April 03, 2016
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क्या लिखूँ दिल की हकीकत आरज़ू बेहोश है,ख़त पर हैं आँसू गिरे और कलम खामोश है!

कतल हुवा इस तरह हमारा किश्तों में , कभी खंजर बदल गये कभी कातिल ।।

लोग समजते हे की में तुम्हारे हुस्न पे मरता हूँ , अगर तुम भी यही समजते हो तो सुनो ; जब हुस्न खोदो तब लौट आना !!

किसी ने कहा था महोब्बत फूल जैसी है!!कदम रुक गये आज जब फूलों को बाजार में बिकते देखा!

बस ऐक चहेरे ने तन्हा कर दिया हमे, वरना हम खुद ऐक महेफिल हुआ करते थे…..!!!

तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी.., एक हम है कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे….

अजब तमाशा हे मिट्टी से बने लोगो का , बेवफाई करतो तो रोते हे अगर वफा करो तो रुलाते हे !.

जब आप कुछ गंवा बैठते हैं, तो उससे प्राप्त शिक्षा को न गंवाएं।

कसम खुदा की जिस दिन ये जहा छोड़ के जाऊंगा,ना तेरी कसमे वापस होगी ना मोहोब्बत..

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